शरीररचना विज्ञान
शरीर की संरचना तथा उसके अंगों का अध्ययन।
प्रमाणित हिन्दी नामों के आधार पर ज्ञान-क्षेत्र और संकल्पना-प्रकार देखें। अंग्रेज़ी नाम सहायक रूप में दिए गए हैं।
शरीर की संरचना तथा उसके अंगों का अध्ययन।
शल्य क्रिया के लिए उस स्थिति का निर्माण करना जिससे की व्यक्ति को दर्द और अहसास न हो। यह कई प्रकार से किया जा सकता है। किसी व्यक्ति को पूरी तरह से बेहोश करके या किसी हिस्से को चेतनाशून्य करके। पूरी तरह से बेहोश करने को जनरल एनेस्थीसिया और किसी हिस्से को चेतनाशून्य करने को लोकल या रीज़नल एनेस्थीसिया कहा जाता है। इस अवस्था को प्रदान करने वाले चिकित्सक को मूर्छक, बेहोशी का डाक्टर (अनेस्थेटिक, अनेस्थेटिस्ट, अनेस्थेसीओलोजिस्ट) कहते हैं।
जीवरसायन विज्ञान या जैवरासायनिकी (अंग्रेज़ी -Biochemistry) रसायन शास्त्र की वह शाखा है जो जीवों के भीतर और उनसे संबंधित रासायनिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करती है जैसे कि पेड़-पौधों और जानवरों और उनके जैविक प्रक्रमों से सम्बन्धित विद्या। इसके अन्तर्गत जीवित कोशिकाओं में विद्यमान अवयव का संगठन और और उनमें घटित होने वाले परिवर्तनों का अध्य्यन किया जाता है।
परिसंचरण तंत्र या वाहिकातंत्र (circulatory system) अंगों का वह समुच्चय है जो शरीर की कोशिकाओं के बीच पोषक तत्वों का यातायात करता है। इससे रोगों से शरीर की रक्षा होती है तथा शरीर का ताप एवं pH स्थिर बना रहता है। अमिनो अम्ल, विद्युत अपघट्य, गैसें, हार्मोन, रक्त कोशिकाएँ तथा नाइट्रोजन के अपशिष्ट उत्पाद आदि परिसंचरण तंत्र द्वारा यातायात किये जाते हैं। केवल रक्त-वितरण नेटवर्क को ही कुछ लोग वाहिका तंत्र मानते हैं जबकि अन्य लोग लसीका तंत्र को भी इसी में सम्मिलित करते हैं।